किडनी की पथरी के बारे में सभी जरुरी बातें | लक्षण | कारण | इलाज | परिचय

किडनी की पथरी के बारे में सभी जरुरी बातें | लक्षण | कारण | इलाज | परिचय

किडनी का परिचय और कार्य

गुर्दे (kidneys), मूत्रनली (ureters), मूत्राशय (bladder) और मूत्रमार्ग (urethra) यह यूरिनरी सिस्टम के अवयव है।
रक्त को फ़िल्टर करके उसमें से कचरे को प्रवाही (पिशाब) के रूप में अलग करने का कार्य किडनी द्वारा किए जाता है।
पिशाब को बाहर फेकने का कार्य संपूर्ण यूरिनरी सिस्टीम द्वारा किया जाता है।

किडनी की पथरी

किडनी स्टोन यानी की गुर्दे की पथरी का दर्द असहनीय होता है। यह समस्या इतनी आम हो गई है कि इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
किडनी में स्‍टोन यूरीन सिस्टम का एक रोग है जिसमें किडनी के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर जैसी कठोर वस्तुएं बन जाती है।
किडनी की पथरी अनेक प्रकार के खनिजों के जमावट से तैयार होती है।
यह पथरी मरीज की यूरिनरी सिस्टम के किसी भी अवयव में अटक जाती है और मध्यम से बहुत ज्यादा दर्द का कारण बन सकती है।

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किडनी की पथरी के लक्षण

लक्षण मुख्यतया इस बात पर निर्भर करते हैं कि पथरी का आकार क्या है और कहां स्थित है।

दर्द : मुख्य लक्षण 

किडनी की पथरी जितनी बड़ी होता है उतना ही ज्यादा दर्द होता है।

अधिकतर दर्द जब पथरी मूत्रनली या मूत्रमार्ग से गुजरती है तब होता है।

छोटे-छोटे टुकड़े गुर्दे में पड़े रहें तो इनका पता नहीं चलता, न कोई कष्ट ही होता है, लेकिन जैसे ही यह टुकड़ा ‘यूरेटर’ में प्रवेश करता है, वैसे ही अचानक भयंकर दर्द होता है जिसे ‘रेनल कॉलिक’ कहते हैं।

जब पथरी किडनी में या उसके नजदीक मूत्रनली में होती है तो दर्द कमर के साइड के हिस्से में बना रहता है और चलने-फिरने पर दर्द बढ़ जाता है।

यह दर्द अचानक शुरू होता है, दर्द की तीव्रता बढ़ती जाती है और यह जांघों, अण्डकोषों, वृषण, स्त्रियों में योनिद्वार तक पहुंच जाता है।

जिस किडनी में पथरी होती है उस साइड में किडनी के स्थान पर दर्द होता है। जैसे पथरी नीचे सरकती है, दर्द की जगह भी बदलती जाती है।

पीड़ा के अलावा किडनी स्टोन के कुछ अन्य लक्षण इस प्रकार के है >>

  • कभी-कभी मूत्र मार्ग में पथरी फंसने के कारण पेशाब बंद हो जाता है।
  • ‎कभी-कभी मूत्र-मार्ग से छोटी पथरी के गुजरकर बाहर निकलने के बाद घाव हो जाने के कारण मूत्र-मार्ग से रक्त भी आ सकता है।
  • ‎पिशाब में जलन होना।
  • ‎पिशाब में बदबू आना।
  • ‎भूख कम लगना।
  • ‎बार-बार पेशाब लगना।
  • ‎लाल और धुंधला पेशाब।
  • ‎जी मचलना।
  • ‎उल्टी आना।
  • ‎अत्यधिक पसीना आना।
  • ‎चक्कर आना, आदि।

सूचना : लेकिन यह लक्षण के और भी बहुत सारे कारण हो सकते हैं इसलिए किसी विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श करें।

पथरी होने के कारण

चार मुख्य कारण

पथरी निर्माण करने वाले खनिजों की जमावट होने के चार मुख्य कारण इस प्रकार है »

  1. कैल्शियम, ऑक्सालेट, फॉस्फेट, यूरिक एसिड जैसे पथरी निर्माण करने वाले खनिजों की अधिक मात्रा
  2. ‎पथरी तैयार होने में रूकावट डालने वाले सहायक तत्वों की कमी, जैसे साइट्रेट, पानी।
  3. ‎प्रतिकार शक्ति का कमजोर होना।
  4. ‎किडनी का कमजोर होना।

सहायक कारण

पथरी के निर्माण में सहायक कारण इस प्रकार है »

  • तले-भुने एवं वसायुक्त आहार का अधिक सेवन
  • ‎मोटापा
  • ‎पानी कम पीने की आदत
  • ‎कैल्शियम की दवाई का अधिक सेवन
  • ‎विटामिन डी का अत्यधिक सेवन
  • ‎गठिया रोग
  • ‎अनियमित जीवनशैली और खानपान
  • ‎व्यायाम की कमी
  • ‎नींद की कमी
  • ‎प्राणवायु की कमी
  • ‎पाचन प्रणाली की कमजोरी
  • ‎थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता के कारण शरीर में कैल्शियम के स्तर में बढ़ोतरी हो जाती है।

पथरी की जांच (Investigations)

  1. पेशाब में लाल रक्त कोशिकाएं पाई जाती हैं।
  2. एक्स-रे (X ray of KUB) कराने पर पथरी स्पष्ट दिखाई पड़ती है |
  3. यूरेटर (मूत्र नलियों) को रंगने वाले पदार्थ (डाई) की रक्त वाहिकाओं के द्वारा वहां तक पहंचाकर एक्स-रे करने पर और स्पष्ट पता चल जाता है।
  4. सोनोग्राफी (USG) जांच द्वारा भी सही-सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
  5. सी टी स्कैन ‎(CT scan) पेट के CT स्कैन में भी इसके बारे में पता चलता है।

उपचार : कैसे किडनी की पथरी को बाहर निकालें ?

उपचार : कैसे किडनी की पथरी को बाहर निकालें ?

पथरी के प्रकार का उपचार पर प्रभाव >>

पथरी कौन से खनिज से बनी हुई है इस बात का भी उसके बाहर निकलने की प्रक्रिया पर असर होता है।

कुछ पथरियाँ प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने में दूसरी पथरियों की अपेक्षा आसान होती हैं

 

पथरी के आकार का उपचार पर प्रभाव >>

पथरी का आकार अलग-अलग हो सकता है।

कुछ तो रेत के दानें की तरह बहुत छोटी तो कुछ मटर के दाने से भी बड़ी हो सकती है।

किडनी की पथरी का उपचार उसके आकर पर आधारित होता है।

  • 3mm से छोटी पथरी

अनेक घरेलू उपचारों से और रोग विशेष होम्योपैथिक दवाई से 3mm से छोटी साइज की पथरी के बाहर निकलने की संभावना अधिक होती है।

  • 3mm से 11mm की पथरी

अगर किडनी की पथरी 3mm या उससे बड़ी हो जाती है तो सिर्फ घरेलू उपचारों से या रोग विशेष होम्योपैथिक दवाई से उसके निकलने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है।

3mm से 11mm की पथरी से छुटकारा पाने के लिए तीन तरह की होम्योपैथी दवाई की आवश्यकता होती है >>

  1. व्यक्ति विशेष होम्योपैथिक दवाई
  2. रोग विशेष होम्योपैथिक दवाई और
  3. प्रतिकार शक्ति वर्धक होम्योपैथिक दवाई।
  • 11mm से बड़ी पथरी

अगर किडनी की पथरी 11mm से बड़ी हो जाती है तो सिर्फ होम्योपैथिक दवाई से उसके निकलने की संभावना कम हो जाती है।

ऐसे में अन्य आधुनिक उपचार की भी जरुरत होती है।

आधुनिक उपचार के विकल्प कुछ इस प्रकार है »

  1. शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (shock wave lithotripsy) : इसे एक्सट्राकॉर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ESWL) भी कहते है।

इसमें मरीज को एक लिथोट्रिप्टर (lithotripter) नाम की मशीन के नीचे लेटाया जाता है। यह मशीन उच्च दबाब वाली ध्वनि तरंगो को मरीज के शरीर में भेजती है।

यह झटके की तरंगें (shock waves) बड़ी पथरी के छोटे छोटे टुकड़े करने में सक्षम होती हैं, जिन्हे बाद में सामान्य तौर पर मूत्र मार्ग से बाहर निकाला जा सकता है।

इसमें कोई आपरेशन वगैरह नहीं करना पड़ता, किन्तु इससे पथरी बनने की प्रवृत्ति नहीं समाप्त होती।

2. यूरेटेरोस्कोपी (ureteroscopy) :

इस प्रक्रिया का उपयोग बड़ी किडनी की पथरियों (kidney stones) को तोड़ने या निकालने में किया जा सकता है।
एक लम्बा ट्यूब जैसा उपकरण यूरेटैरोस्कोप कहलाता है जिसे मूत्रमार्ग और मूत्राशय से होते हुए मूत्रनली में डाला जाता है, जहाँ पर किडनी की पथरी सामान्य तौर पर अटक जाती है।

एक लेज़र का उपयोग करके पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है जो मूत्र से बाहर निकल सकते हैं।

3. परक्युटेनियस नेफ्रोलिथोटोमी (percutaneous nephrolithotomy)

यह प्रक्रिया यूरेटेरोस्कोपी (ureteroscopy) के जैसी ही होती है, पर यह थोड़ी ज्यादा गंभीर होती है और सामान्य तौर पर ज्यादा गंभीर पथरियों के लिए उपयोग की जाती है।

पीठ में एक चीरा लगाकर एक ट्यूब को सीधा किडनी में डाल दिया जाता है।

एक प्रोब (probe) से पथरी में तरंगों (shock waves) को उसे तोड़ने के लिए भेजा जाता है, और एक छोटी ट्यूब जिसे नेफ्रोस्टोमी ट्यूब कहते हैं उसे किडनी में डाल कर मूत्र और पथरी के टुकड़ों को बाहर निकाल लिया जाता है।

मरीज को सामान्य तौर पर प्रारंभिक प्रकिया के बाद दो या तीन दिन हॉस्पिटल में रहना पड़ता है।

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प्रतिरोधक उपचार की आवश्यकता

जिन मरीजों के लिए ऑपरेशन करना अनिवार्य है, उन्हें भी ऑपरेशन के बाद होम्योपैथी से उपचार करवाना जरुरी है।

क्योंकि उनकी इस ऑपरेशन लायक पथरी की साइज से यह बात स्पष्ट है कि उनका शरीर पथरी बनाने में सक्रिय है।

अगर ऑपरेशन के बाद मूल कारणों को दूर नहीं किया जाता तो फिरसे पथरी बनने की संभावना बनी रहती है।

मैंने ऐसे अनेक मरीजों को देखा जिन्होंने 2 से 3 बार ऑपरेशन या यांत्रिक उपचार द्वारा पथरी को निकाला था, फिर भी पथरी वापस बनती रही।

प्रतिरोधक होम्योपैथिक उपचार द्वारा पथरी होने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है।

THE MAN BEHIND THE MISSION

Dr. Ashish L. Thakkar

Homoeopath | Speaker | Author
Health Educator & Researcher

पिछले 18 सालों में, होमियोपैथ की भूमिका में, आपने अपने हजारों मरीजों को पुराने और पीड़ादायक रोगों से मुक्त किया है और अनेको को ऑपरेशन से भी बचाया है।

आप खुद को और अपने बच्चों को 17 सालों से बिना किसी दवाई के स्वस्थ रखने में सफल रहे हैं।

आशा करता हूँ कि आपको यह जानकारी अवश्य पसंद आयी होगी।

इस जानकारी के इस्तेमाल से आप को जो भी अनुभव आए, उसे हमें अवश्य बताए।

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अस्वीकरण: इस वेबसाइट में दी गई जानकारी आपके स्वास्थ्य के ज्ञान को बढ़ाने के लिए दी गई है। किसी भी  रोग के इलाज और अधिक जानकारी हेतु अपने डॉक्टर की सलाह जरुर ले।

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