क्या अपेंडिक्स की सूजन बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकती है ?

क्या अपेंडिक्स की सूजन बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकती है ?

जी हाँ, कुछ प्रकार की अपेंडिक्स की सूजन बिना ऑपरेशन के ही ठीक हो सकती है !

अपेंडिक्स की सुजन का उपचार "ऑपरेशन से या बिना ऑपरेशन के करना है" इसका आधार रोग के प्रकार और अवस्था पर करता है। उपचार का निर्णय लेते वक्त रोगी की अवस्था को भी ध्यान में रखा जाता है। इसका निर्णय किसी अच्छे विशेषज्ञ के मार्गदर्शन से ही लेना चाहिए।

अपेंडिक्स की सुजन के प्रकार

अपेंडिक्स की सुजन तीन प्रकार की होती है >>

१. तीव्र प्रकार की सूजन (Acute Appendicitis)

इस प्रकार की सुजन अचानक प्रगट होती है और इस के लिए तुरंत उपचार होना आवश्यक होता है। यह उपचार अधिकतर ऑपरेशन होता है।

२. जीर्ण प्रकार की सुजन (Chronic Appendicitis)

कुछ मरीजों में यह सुजन कम और उसके लक्षण कम तीव्र होते है। इनके मूल कारण अगर नहीं होते तो यह सुजन जीर्ण रोग का रूप ले लेती है। इसमें पेट के निचले दाहिने हिस्से में हल्का या माध्यम तीव्रता का दर्द होते रहता है। कुछ मरीजों में दर्द न होकर पेट के उस हिस्से में सिर्फ असुविधा महसूस होती रहती है।

३. बार बार होने वाली सुजन (Recurrent Appendicitis)

नाम से ही हमें पता चल जाता है कि यह सुजन बार बार प्रगट होती है।

कुछ मरीजों में जीर्ण हुई सुजन हमेशा के लिए नहीं बनी रहती। वह कुछ समय के अंतरालों में बार बार होती रहती है। इसमें दर्द भी कुछ समय के बिलकुल ठीक हो जाता है और कुछ समय के लिए प्रगट होते रहता है।

रोग के मूल कारणों को नष्ट किया जाए तो, जीर्ण और बार बार होने वाली सुजन, बिना ऑपरेशन के ठीक होने की संभावना बहुत ही अधिक होती है।

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अपेंडिक्स की सुजन के दो मुख्य मूल कारण

अपेंडिक्स की सुजन के दो मुख्य मूल कारण इस प्रकार है >>

  1. शरीर में विष द्रव्यों (Toxins) का जमा होना और
  2. रोग प्रतिकार शक्ति का कमजोर होना।

ऐसा माना जाता है कि, "अपेंडिक्स में सुजन कीटाणु के प्रवेश करने से आती है"।

लेकिन यह अर्ध-सत्य है।

तो फिर पूर्ण सत्य क्या है ?

कुछ उदाहरणों के माध्यम से इसे समझते है :

कहाँ पर मच्छर बड़ी संख्या में आते हैं ?

कब चींटियाँ बड़ी संख्या में दिखतीं हैं ?

जहाँ गंदगी होती है, वहीं पर मच्छर बड़ी संख्या में आते हैं और जहाँ पर शक्कर या मीठी चीजें होतीं हैं, वहीं पर चींटियाँ बड़ी संख्या में दिखतीं हैं।

उसी प्रकार कीटाणु भी, उसी शरीर में रहना और अपनी संख्या बढ़ाना पसंद करते हैं, जिस शरीर में उनके लिए खाना अधिक मात्रा में उपलब्ध है।

कीटाणु का खाना यानी हमारे शरीर में जमा हुआ कचरा और विषद्रव्य।

पहले कचरा जमा होता है और बाद में कीटाणु आते हैं।

यानी जहाँ कूड़ा वहाँ कीड़ा !

इस बात से यह स्पष्ट होता हैं कि :

सिर्फ कीटाणु के शरीर में प्रवेश करने या होने मात्र से रोग उत्पन्न नहीं होते।

कीटाणु को रोग उत्पन्न करने के लिए दो बातों का होना जरूरी हैं

  1. शरीर में उनके लिए खाना जमा होना अर्थात् शरीर में कचरा और विषद्रव्य जमा होना।
  2. शरीर के सुरक्षा सैनिकों का कमजोर होना अर्थात प्रतिकार शक्ति कमजोर होना।

क्यों शरीर में विषद्रव्य जमा होता है ?

हमारे भीतर एक जबरदस्त उपचारक तत्व है।

इसे प्रतिकार शक्ति या आंतरिक उपचारक कहते है। यह उपचारक तत्व, अनंत प्रज्ञा और अनंत शक्ति का खजाना है।

माँ के गर्भ में, एक सूक्ष्म पेशी में से हमारे संपूर्ण शरीर का निर्माण इसी अनंत प्रज्ञा द्वारा हुआ है! जो निर्माण कर सकता है वह उपचार भी कर सकता है!

अगर हमारी प्रतिकार शक्ति सशक्त हैं, तो वह शरीर में विषद्रव्यों को जमा नहीं होने देती और हर तरह के कीटाणु से हमारी रक्षा करती है।

लेकिन किसी कारण वश जब प्रतिकार शक्ति कमजोर होती है, तब वह अपना रोज का काम पूरा नहीं कर पाती। इससे शरीर में दूषित पदार्थों का बोझ तेजी से बढ़ने लगता है।

इसीलिए एक ही तरह के वातावरण में रहने वाले और एक जैसा  खाना खाने वाले व्यक्तियों में से सिर्फ कुछ व्यक्ति बीमार पड़ते है।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अपेंडिक्स और अन्य कीटाणु-जन्य रोगों का मुख्य कारण कीटाणु नहीं, लेकिन कमजोर रोग-प्रतिकारक शक्ति हैं।

अगर रोग प्रतिकार शक्ति सशक्त है और कीटाणु के लिए योग्य आहार यानी विष तत्व हमारे शरीर में नहीं है तो कीटाणु हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। अंत में वे स्वयं नष्ट हो जाते हैं।

क्या है सर्वोत्तम उपचार ?

सर्वोत्तम उपचार रोगों के मूल कारणों को सुरक्षित तरीकों से नष्ट करने में सहायता करता है वही है सर्वोत्तम उपचार !

यानी "रोग-प्रतिकारक शक्ति बढ़ाना और शरीर से विष द्रव्यों को बाहर निकलना" यही है सर्वोत्तम उपचार के मुख्य लक्षण !

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प्रतिकार शक्ति वर्धक आहार योजना

रोगों के मूल कारणों का सुरक्षित और सस्ता उपाय

4 स्टेप होमियोपैथी ट्रीटमेंट

यह एक वैज्ञानिक उपचार पद्धति है जिसमें प्रतिकार शक्ति को रोगों को नष्ट करने के लिए सक्रिय और शक्तिशाली बनाया जाता है।

इसमें होमियोपैथिक दवाई, आहार योजना, योग-प्राणायाम, जीवनशैली परिवर्तन और माइंड रिसेट जैसी कुदरती पद्धतियों द्वारा संयुक्त उपचार किया जाता है।

क्या "4 स्टेप होमियोपैथी ट्रीटमेंट" अपेंडिक्स की सुजन के लिए लाभकारी है ?

अपेंडिक्स की सुजन के लिए "4 स्टेप होमियोपैथी ट्रीटमेंट" से नीचे दिए हुए दो में से किसी एक तरीके से लाभ हो सकता है >>

संभावना - 1

अधिकतर जीर्ण और बार बार होने वाली अपेंडिक्स की सुजन में, मरीजों की प्रतिकार शक्ति बढ़ने की वजह से, उन्हें ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती।

संभावना - 2

कुछ मरीजों की या उनकी बीमारी की अवस्था ऐसी होती है कि उनका ऑपरेशन करना अनिवार्य होता है।

जिन मरीजों के लिए ऑपरेशन करना अनिवार्य है, उन्हें इस उपचार द्वारा होने वाले लाभ कुछ इस प्रकार है :

  • ऑपरेशन के बाद ठीक होने की गति बढ़ती हैं।
  • ऑपरेशन के बाद यह सुजन आंतों फिर से होने की संभावना कम हो जाती है।

जिन मरीजों के लिए ऑपरेशन करना अनिवार्य है, उनको तो इस ट्रीटमेंट की सबसे ज्यादा जरूरत है।

क्योंकि उनकी इस ऑपरेशन लायक अवस्था से यह बात स्पष्ट है कि उनकी प्रतिकार शक्ति बहुत ही कमजोर हो चुकी है।

अगर ऑपरेशन के बाद मूल कारणों को दूर नहीं किया जाता तो यह सुजन आंतों में होने की संभावना बनी रहती है।

मैंने ऐसे अनेक मरीजों का उपचार किया है जिनकी पेट दर्द की तकलीफ अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बाद भी ठीक नहीं हुई थी। लेकिन "4 स्टेप होमियोपैथी ट्रीटमेंट" के बाद उनकी यह तकलीफ जड़ ठीक हो गयी।

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