प्रतिकार शक्ति बढ़ाने के लिए खाएं ये 10 पॉवर फूड्स : सुरक्षित और सस्ता उपचार

प्रतिकार शक्ति बढ़ाने के लिए खाएं ये 10 पॉवर फूड्स : सुरक्षित और सस्ता उपचार

प्रतिकार शक्ति क्या है ?

 इस विश्व में सिर्फ एक उपचारक तत्व है और वह हमारे भीतर है।

जी हाँ, हमारे भीतर एक महाशक्तिशाली उपचारक और रक्षक तत्व है।

इसे अनेक नाम से जाना जाता है, जैसे-

  • प्रतिकार शक्ति
  • आंतरिक उपचारक
  • आंतरिक उपचारक तत्व
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता
  • जीवन शक्ति / आत्म शक्ति, आदि। 

यह आंतरिक उपचारक तत्व, अनंत प्रज्ञा और अनंत शक्ति का खजाना है।

माँ के गर्भ में, एक सूक्ष्म पेशी में से हमारे संपूर्ण शरीर का निर्माण इसी अनंत प्रज्ञा द्वारा हुआ है! जो निर्माण कर सकता है वह उपचार भी कर सकता है!

अगर आंतरिक उपचारक तत्व सशक्त है, तो वह सभी प्रकार की बीमारियों से हमारी रक्षा करता है और बीमारी आने पर उसे जल्दी से ठीक भी करता है।

कमजोर प्रतिकार शक्ति : रोगों का मुख्य कारण

 आज कल कीटाणु से होनेवाले और अन्य रोग बढ़ते जा रहे हैं। अधिकतर लोग वातावरण और खाने पीने के कीटाणु, वातावरण के केमिकल या अन्य बाहरी घटकों को इसका कारण मानते हैं।

लेकिन यह अर्ध-सत्य हैं।

एक ही तरह के वातावरण में रहने वाले और एक जैसा बाहर का खाना खाने वाले अनेक लोगों से सिर्फ कुछ लोग बीमार पड़ते है।

ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि कीटाणु जन्य रोगों का मुख्य कारण कीटाणु या बाहरी घटक नहीं, लेकिन कमजोर आंतरिक उपचारक हैं।

अगर हमारी आंतरिक उपचारक सशक्त है, तो वह हर तरह के कीटाणु और बीमारी से हमारी रक्षा करती है।

रोग और इलाज की दर्दनाक यातनाओं से बचना हैतो हमारे आंतरिक उपचारक तत्व को सशक्त बनाना आवश्यक है।

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प्रतिकार शक्ति वर्धक 10 पॉवर फूड्स

प्रतिकारक शक्ति को मजबूत बनाने के लिए सही आहार द्वारा आवश्यक पोषक तत्वों की प्राप्ति होना जरूरी है।

आज इस लेख में, हम ऐसे ही प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाने वाले 10 पॉवर  फ़ूड के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले है !

1. बीन्स (Beans)

हरी बीन्स एक ऐसी सब्जी है जिसके इस्तेमाल से आपके शरीर की पौष्टिक आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हो जाती है। कई फायदेमंद खनिजों से परिपूर्ण हरी बीन्स में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए, सी, के और बी 6 पाया जाता है. ये फॉलिक एसिड का भी एक अच्छा स्रोत हैं।

इसके अलावा इनमें कैल्शियम, सिलिकॉन, आयरन, मैंगनीज, बीटा कैरोटीन, प्रोटीन, पोटैशियम और कॉपर की भी जरूरी मात्रा होती है। यह एक ऐसी सब्जी है जिसे कहीं भी आसानी से उगाया जा सकता है और यह लगभग पूरे साल बाजार में उपलब्ध होती है।

बीन्स का इस्तेमाल सब्जी बनाने, सलाद बनाने और कई दूसरे व्यंजनों में किया जाता है।

हरी बीन्स में पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जिससे इम्यून सिस्टम बेहतर बनता है. ये कोशिकाओं की क्षति को ठीक करके नई कोशिकाओं के बनने को प्रोत्साहित करता है।

इसमें मौजूद कई तरह के लवणों से आंखों की रोशनी भी बेहतर बनती है.

बीन्स के नियमित सेवन से पेट भी स्वस्थ रहता है. इनके सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है और गैस, कब्ज और मरोड़ की परेशानी नहीं होती है.

2. जई (Oats)

यह आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है।

यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे बच्चे कई प्रकार के रोगों से बच सकते हैं। ओट्स में फोलिक एसिड होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है।

आज कल वातावरण में इतना धुआँ फैल गया है कि इसकी वजह से छोटे बच्चों को अस्थमा होने के की बीमारी आम सी हो गई है। अगर आप अपने बच्चों को नाश्ते में ओट्स का सेवन करवाते हैं तो यह आपके बच्चों को अस्थमा जैसी बीमारियों से भी दूर रखेगा।

ओट्स में पाए जाने वाले फाइबर की वजह से हमारे आंत और मलाशय मजबूत रहते हैं और इन को काफी फायदा पहुंचता है। रोज  का सेवन करते हैं तो आपको कब्ज जैसे कई परेशानियों से निजात मिल जाएगी।

3. सोयाबीन (Soyabean)

सोयाबीन में दूध, अंडे और मांस से कहीं अधिक प्रोटीन की मात्रा होती है। इसके अलावा इसमें कई तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन्स, कैल्शियम, आयरन और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स भी पाए जाते हैं जो हमारें रोग प्रतिकार तंत्र को मजबूत बनाने लिए सहायक होते है। सोयाबीन शरीर के विकास में भी लाभदायक है।

सोयाबीन में उपस्थित फॉस्फोरस (phosphorous) और लेसिथिन (lecithin) नामक पदार्थ याददाश्त और फेफड़ो से संबंधित परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।

4. खजूर

खजूर खाना सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इस में विटामिन-ए, विटामिन बी-12, विटामिन-सी, सोडियम, कैल्शियम, सल्फर, क्लोरीन, फॉस्फोरस, आयरन और एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व का अच्छा स्रोत है।

इसलिए हमारें रोग प्रतिकार तंत्र को शक्तिशाली बनाने में यह लाभकारी है। खजूर शरीर के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है और शत्रु बैक्टीरिया को मारने में सहायता करता है।

यह , बुखार, सर्दी, खांसी, सांस के रोग, पेचिस और दिमागी कमजोरी दूर करने मदद करता है।

इसे खाली पेट खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

अगर बच्चे को कब्ज की परेशानी है, रात को सोने से पहले कुछ खजूर पानी में भिगो दें और सुबह उन्हें खिला दें।

इसे खाने से खून में हीमोग्‍लोबिन बढ़ता है और कैल्शियम की कमी पूरी होती है।

इसमें फ्लोरीन नामक मिनरल होता है जो कि दांतों की समस्या (जैसे, दांत का दर्द, सडऩ, आदि) को दूर करता है।

5. गाजर (Carrot)

गाजर न सिर्फ खाने में मीठा होता हैं, बल्कि यह सेहत के लिए भी बहुत ही लाभदायक होता है।

गाजर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने ने में सहायक हैं। यह बच्चों को सर्दी-जुकाम, खांसी आदि से भी बचाता हैं। इसके सेवन से शरीर को कई सारी बीमारियों से सुरक्षा मिलती हैं।

गाजर में विटामिन K होता हैं जो चोट लगने पर खून को जमने में सहायता करता हैं और खून का बहना बंद करता हैं। विटामिन K चोट को जल्दी से ठीक करने में भी मदद करता हैं।

गाजर में विटामिन सी होता हैं जो मसूड़ों को स्वस्थ बनाये रखने में लाभकारी हैं।

छोटे बच्चे के जब नए दांत निकलने लगते हैं, उस समय उन्हें गाजर का जूस पिलाना चाहिए। इससे दांत आसानी से निकल जाते हैं और बच्चे को दूध भी आसानी से हजम होने लगता है।

बच्चा जब चलने लायक होने लगे तो उसे गाजर के जूस में संतरे का जूस मिलाकर कर पिलाना चाहिए। इससे बच्चा शक्तिशाली बनता हैं और जल्दी से चलने लगता हैं।

गाजर में विटामिन-ई पाया जाता हैं जो नया खून जल्दी से बनाने में लाभकारी होता हैं। इसलिए खून की कमी दूर करने और एनीमिया की बीमारी में गाजर या उसके जूस का इस्तेमाल करना चाहिए।

गाजर का जूस पीने से खून की भी सफाई होती है। इसीलिए इसे कुदरती रक्त-शोधक (खून की सफाई करने वाला) कहा जाता है।

गाजर को आप कच्चा सलाद या जूस के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और इसका सूप, सब्जी आदि में भी उपयोग कर सकते हैं। सर्दियों के मौसम में गाजर का हलवा भी बना कर खाया जाता हैं।

गाजर का जूस हमेशा ताज़े गाजरों से बनाना चाहिए।

6. अंकुरित दाल (Sprouted Pulses)

सेहतमंद रहने के लिए अंकुरित दाल को काफी लाभदायक माना जाता है। यही कारण है कि इसे सुबह के नाश्ते के अलावा कई लोग भोजन में भी नियमित तौर पर शामिल करते हैं।

अंकुरित दाल को नियमित खाने से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है और शरीर के हानिकारक तत्वों को से मुक्ति पाने में मदद मिलती है।

अंकुरित दालों में क्लोरोफिल, विटामिन्स (ए, बी, सी, डी और के) और खनिज लवन (जैसे, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, आदि) भरपूर मात्रा में पायें जाते है।

अंकुरण की प्रक्रिया के बाद दाल में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन अधिक पाचक व पौष्टिक हो जाते हैं। अंकुरण से इनमें विटामिन-सी, बी-कॉम्प्लेक्स, थायमिन, राइबोफ्लेविन व नायसिन की मात्रा दोगुनी हो जाती है। इसके साथ ही शरीर में विटामिन ए के निर्माण में सहायक कैरोटीन की मात्रा में भी वृद्धि होती है।

अंकुरित दाल में चना, मूंग, छोला, मूंगफली, मटर, आदि का समावेश होता है।

अंकुरित दाल को कच्चा खाना अधिक फायदेमंद होता है। आप चाहें तो इसमें कुछ सब्जियों को काटकर मिला सकते हैं, और नींबू या दही के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं।

पका कर खाने पर इनके पोषक तत्व कम हो जाते हैं।

7. चोकर समेत अनाज (Bran)

भारत में अनाज एक प्रमुख आहार है, जिनमें गेहूं की सर्वोच्च भूमिका है।

अनाज को पिसवाने के बाद छाना जाता है। छानने में गेहूँ, ज्वार मक्का आदि अनाज का ऊपरी छिलका छलनी में ही रह जाता है। अनाज का यह बाह्य आवरण पिसने के बाद गेहूं की भूसी [ चोकर ] में परिवर्तित हो जाता है।

अधिकतर लोग इस बची हुई चोकर को अनुपयोगी समझकर फेंक देते हैं, जबकि चोकर में बहुत से विटामिन्स और मिनरल्स होते है।

आटे में चोकर होने की वजह से रोटियां भले ही थेाड़ी बेस्‍वाद लगे लेकिन वह अधिक पौष्टिक होती है।

चोकर पेट को साफ रखने में मदद करता है। चोकर युक्त आटा खाने से कब्ज नहीं होता और ना ही पेट भारी रहता है। बच्चों का पेट हमेशा साफ रहना प्रतिकार शक्ति के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यह शरीर में रक्त बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत बनाने में लाभकारी है।

8. दही (Curd)

दही में प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

दूध जब दही का रूप ले लेता है, तब उसकी शर्करा अम्ल में बदल जाती है। इससे पाचन में मदद मिलती है।

जिन लोगों को पेट की परेशानियां, जैसे अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गर्मी दूर हो जाती है, पाचनक्रिया अच्छी तरह से होने लगती है और भूख खुलकर लगती है।

अच्छी पाचनक्रिया यह प्रतिकार तंत्र को सक्रिय रखने के लिए जरूरी है।

यह खून की कमी और कमजोरी दूर करता है।

दही के साथ शहद मिलाकर जिन बच्चों के दांत निकल रहे हों, उन्हें चटाना चाहिए। इससे दांत आसानी से निकल जाते हैं।

दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों के विकास में सहायक होता है। साथ ही, दांतों और नाखूनों को भी मजबूत बनाता है। इससे मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में मदद मिलती है।

9. विटामिन-सी युक्त फल

(Vitamin C Fruits)

 

विटामिन सी का उपयोग हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है। हर दिन बच्चों को विटामिन-सी युक्त फल खिलाने से उनकी रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है।

विटामिन सी, शरीर में अस्थमा के लिए जिम्मेदार हिस्टामाइन के उत्पादन को कम करता है जिससे अस्थमा व सांस संबंधी समस्या होने की संभावना कम हो जाती है। विटामिन सी के एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व फेफड़ों की सफाई करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

यह एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। ये शरीर की कोशिकाओं को एकजुट कर के रखता है। इसके एंटी-हिस्टामीन गुण के कारण, यह सामान्य सर्दी-जुकाम में भी दवा के रूप में काम करता है। विटामिन सी के नियमित उपयोग से सर्दी, खांसी व अन्य तरह के इन्फेक्शन होने की संभावनाएं भी कम हो जाती है।

हड्डियों को जोड़ने वाला कोलाजेन नामक पदार्थ, रक्त वाहिकाएं, कार्टिलेज आदि के निर्माण के लिए विटामिन सी की आवश्यकता होती है।

विटामिन सी में एक बेहतरीन हीलिंग पावर होता है, जो घाव जल्दी भरने में लाभकारी होता है।

विटामिन-सी युक्त फल

  • खट्टे रसदार फल जैसे आंवला, संतरा, अंगूर, टमाटर, नारंगी, नींबू, आदि।
  • अन्य फल जैसे केला, बेर, अमरूद, सेब, आदि।

10. हरी पत्तेदार सब्जियां

(Green Leafy Vegetables)

यह सब्जियां पेट को कई तरह के गंभीर बीमारियों से भी बचाती है।

इन्हें पका कर खाने के अलावा कच्चा खाना या इनका सूप पीना भी उतना ही फायदेमंद होता है।

पालक, बथुआ, प्याज़ का साग, सरसो, पत्ता गोभी, मेथी और मूली के पत्ते खाने में इस्तेमाल किए जाते है।

इसमें मौजूद फाइबर, कैल्शियम और आयरन पेट की अंदरूनी सफाई करते है। इससे पाचन से संबंधित समस्याएँ दूर होती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। यह प्रतिकार तंत्र को सक्रिय रखने के लिए आवश्यक है।

यह आयरन का बहुत ही अच्छा स्रोत होने के कारण खून की कमी को दूर करती है।

THE MAN BEHIND THE MISSION

Dr. Ashish L. Thakkar

Homoeopath | Speaker | Author
Health Educator & Researcher

पिछले 18 सालों में, होमियोपैथ की भूमिका में, आपने अपने हजारों मरीजों को पुराने और पीड़ादायक रोगों से मुक्त किया है और अनेको को ऑपरेशन से भी बचाया है।

आप खुद को और अपने बच्चों को 17 सालों से बिना किसी दवाई के स्वस्थ रखने में सफल रहे हैं।

आशा करता हूँ कि आपको यह जानकारी अवश्य पसंद आयी होगी।

इस जानकारी के इस्तेमाल से आप को जो भी अनुभव आए, उसे हमें अवश्य बताए।

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अस्वीकरण: इस वेबसाइट में दी गई जानकारी आपके स्वास्थ्य के ज्ञान को बढ़ाने के लिए दी गई है। किसी भी  रोग के इलाज और अधिक जानकारी हेतु अपने डॉक्टर की सलाह जरुर ले।

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